क्या भाजपा नेता सबक लेंगे अपने संगठन मुखिया से…?
उज्जैन।राजनीति में पद मिलते ही नेता बदल जाते हैं। मोहल्ला अध्यक्ष बने तो मोहल्ले में हूटर बजने लगते हैं, जिला अध्यक्ष बने तो शहर में पोस्टरों की दीवारें ढह जाती हैं। और अगर प्रदेश अध्यक्ष हो जाएँ, तो फिर मंदिर का गर्भगृह भी उनके अधिकार क्षेत्र मे आ जाता है।उनको अंदर जाने से कोई नहीं रोक सकता है.?
लेकिन इस बार भाजपा संगठन ने मुखिया बनाया है—हेमंत खण्डेलवाल। ये साहब थोड़े अलग किस्म के निकले। बुधवार को जन्मदिन था। चाहते तो सुबह-सुबह महाकाल मंदिर में “वीवीआईपी दर्शन स्पेशल पैकेज” एक्टिवेट करवा लेते। पुजारियों से लेकर प्रशासन तक कतार में खड़ा कर देते।
मगर खण्डेलवाल जी ने सबको चौंका दिया।
रात को ही चुपचाप उज्जैन पहुँचे, होटल में रुके, और सुबह मंदिर में आम भक्त की तरह दर्शन कर लौट गए।गर्भगृह तक जाने का अधिकार होते हुए भी देहरी पर खड़े होकर दर्शन कर लिए।अब सोचिए—जो काम हर दिन संगठन का एक मामूली कार्यकर्ता करता है, वही प्रदेश अध्यक्ष ने भी किया। यानी नेताओं की भाषा में इसे कहते हैं—“क्रांति”!
संकेत साफ है
भक्ति दिल से होती है, दिखावे से नहीं। अब यह देखना भविष्य में रोचक होगा कि प्रदेश मुखिया के आचरण अनुरूप, संगठन के बाकी 'नेता' कोई सबक लेते है या नहीं...?फिलहाल फैसला वक्त करेगा। बाकी, बाबा महाकाल -हम ओर आम जनता —चुपचाप ये तमाशा देख ही रहे हैं…
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