आशा को ही निराशा, रक्षाबंधन का वादा निभाया नहीं उल्टा दिवाली पर तुगलकी फरमान

Oct 17, 2025 - 02:08
Updated: 12 months ago
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उज्जैन।दिवाली की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।मतलब घर की साफ -सफाई-रंगाई-पुताई अंतिम चरण में है।पैसेवालों और अफसरों के लिए कई नोकर मौजूद है।मगर आम रहवासी के लिए घर की स्त्री ही सब कुछ है।वही तो उसके घर की लक्ष्मी है।जो साफ सफाई से लेकर बाजार की खरीददारी करती है।घर चलाने के लिए नोकरी भी।ताकि उसका परिवार खुश रहे।इनमे से कुछ आशा बहने भी है।जिनको प्रशासन और शासन किसी भी काम मे लगा देता है।यहां तक कि नेताजी की जनसभाओं में भी भीड़ के लिए इनका उपयोग किया जाता है।वही आशा -बहने इन दिनों एक तुगलकी फरमान से परेशान है।

तभी तो आज करीब 50से 75 आशा बहने सम्राट विक्रमादित्य संकुल भवन पहुँची थी।अपनी दो विशेष मांगों को लेकर।इसमें से एक मांग तुगलकी फरमान से मुक्ति दिलाने की थी।तो दूसरी प्रोत्साहन राशि 6000 का भुगतान अभी तक नहीं होने को लेकर थी।यह राशि राखी और दशहरे पर मिलनी थी।किन्तु अभी तक नहीं मिली।जबकि दिवाली नजदीक आ गई है।

ताज्जुब इस बात का है कि राशि से ज्यादा आक्रोश तुगलकी फरमान को लेकर था।आशा बहनों का कहना है।

एक तरफ दिवाली का त्यौहार ,घर की जिम्मेदारी, वही दूसरी तरफ प्रशासन का आदेश। दिवाली के दिन तक काम करो.....आयुष्मान कार्ड बनाओ...वरना परिणाम गम्भीर होंगे।

तभी तो अपनी मांग लेकर पहुँची आशा बहनों ने कहा कि... काम करने में कोई ऐतराज नही है।मगर हमारा भी घर है-परिवार है-बच्चे हैं।हमको भी त्यौहार मनाने का हक है।इसलिए दिवाली तक इस तुगलकी फरमान से मुक्ति दी जाए।उसके बाद आयुष्मान कार्ड भी बनाएगी और जो निर्देश होंगे,उनका भी पालन करेगी।आश्चर्य की बात यह है कि इनमें से कई आशा बहनों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को राखी भी बांध रखी है।उनकी ही विधानसभा क्षेत्र की रहवासी है,फिर भी उनकी गुहार सुनने वाला कोई नहीं है।

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