हे महाकाल, या तो आप सहज-सुलभ हो जाइए, या सबको VIP बना दीजिए

Feb 21, 2026 - 02:34
Updated: 8 months ago
0 477

पहले विशेष दर्शन, फिर भस्मारती और अब संध्या-शयन आरती के टिकट शुरू हो गए हैं। बाबा महाकाल सर्वसुलभ से दुर्लभ होते जा रहे हैं। मंदिर प्रशासन ने आम भक्तों के लिए आम और खास भक्तों के लिए खास सुविधा शुरू की है। जो भक्त भस्मारती से वंचित रह जाते थे, वो संध्या या शयन आरती करके भी खुद को धन्य मान लेते थे। अब ऐसा नहीं होगा। उज्जैन आने वाला हर भक्त भगवान से ज्यादा जुगाड़ ढूंढ़ेगा कि कौन सी आरती की परमिशन कैसे ली जाए। 

बाजार का नियम है, डिमांड बढ़ जाए तो कीमतें ऊंची कर दो। महाकाल में भक्तों की संख्या बढ़ रही है तो मंदिर समिति बाजारवाद के सिद्धांतों पर आमादा हो गई। क्या हर समस्या को सुलझाने के लिए पैसा लगेगा। देखते ही देखते कुछ सालों में महाकाल दर्शन पॉवर गेम बन गया है। आम आदमी आता है। मन में श्रद्धा, आंखों में बाबा महाकाल के दर्शन के सपने लेकर आता है। 50 फीट दूर से भी बाबा को देखकर खुद को भाग्यशाली मान लेता है। भाव विभोर हो जाता है। इतनी दूर से दर्शन का भी कोई गिला-शिकवा नहीं है। वहीं, अगर कोई पैसा या पॉवर वाला पहुंच जाए तो चांदी द्वार से बाबा को निहारने को मिल जाता है, फिर भी उनकी पूरी इच्छा होती है गर्भगृह में घुसकर फोटो चमका ले।

हालांकि, आम आदमी की गलती ही ये है कि वो आम है। इसलिए जिसे भी कोई प्रयोग करना होता है, वो आम आदमी पर ही करता है। VIP पर किसी का जोर नहीं चलता। आम आदमी के दर्शन पर इतने नियम और कायदे थोपने वाला प्रशासन पुजारियों की पहलवानी के आगे ढीला पड़ जाता है। VIP कभी भी कहीं से भी मंदिर में घुस जाते हैं। उन्हें रोकने के लिए कोई नियम नहीं है। मजा ये है कि अभी भी आए दिन भस्मारती के नाम पर पैसे लेने वालों की शिकायतें होती रहती हैं। अब संध्या और शयन आरती के लिए भी ऐसा ही होगा। 

अगर मंदिर में व्यावसायिकता इतनी हावी हो जाएगी, तो लोग श्रद्धा से नहीं ग्लैमर के कारण आएंगे। अगर पैसा देकर ही सबकुछ होना है तो फोन ले जाने की फीस, फोटो खींचने की फीस और रील बनाने के लिए नाचने की फीस भी रख ही दी जाए। सारी लानतें एक बार ही ले लें, बार-बार क्यों गालियां खाना?

अब महाकाल का नाम जपना हो तो घर में मानसिक जाप कीजिए। जोर से ना बोलिए। अगर जय महाकाल की आवाजें साहबों तक पहुंच गई तो टिकट लग जाएगा। हो सकता है, आपको 250 रुपए प्रतिदिन देना भी पड़ जाए। अब तो हम बाबा से ही ये कह सकते हैं कि हे बाबा, या तो आप सहज-सुलभ हो जाइए, या सबको VIP बना दीजिए। बाकी, ये नया निर्णय क्या रंग लाता है हम चुपचाप देख ही रहे हैं।

प्रशासन ने बताया..
सबको vip बना दीजिये..आलेख प्रकाशित होने के बाद प्रशासन द्वारा एक वीडियो चुप को भेजा गया है। जिसमे आरती शुल्क को लेकर चल रहे भ्रम को क्लियर किया गया है। जिसके लिए हम प्रशासन को साधुवाद देते हुए चुप हो जाते है।

What's Your Reaction?

Like Like 24
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User