रात की दस्तक, दिन की तैयारी...  इस बार लापरवाही की नहीं, दूरदर्शिता की बारी

सांध्य प्रकाश विशेष

Jul 07, 2026 - 11:30
Updated: 4 months ago
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उज्जैन।श्रावण-भाद्रपद में निकलने वाली बाबा महाकाल की पारंपरिक सवारी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उज्जैन की आस्था, व्यवस्था और प्रशासनिक क्षमता की भी परीक्षा होती है। शायद यही वजह है कि कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने रात के समय स्वयं अधिकारियों के साथ पूरे सवारी मार्ग का निरीक्षण कर यह संदेश दिया कि तैयारियां फाइलों में नहीं, जमीन पर दिखाई देनी चाहिए।
पहली सवारी 3 अगस्त को निकलनी है, लेकिन उससे पहले सभी निर्माण कार्य और व्यवस्थाएं समय-सीमा में पूरी करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। यह सोच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर हमारे यहां तैयारियां तब तेज होती हैं, जब श्रद्धालु रास्ते में और अधिकारी बैठक में दिखाई देने लगते हैं।इस बार तस्वीर कुछ अलग दिख रही है। रात के अंधेरे में सवारी मार्ग का निरीक्षण यह बताता है कि प्रशासन उन छोटी-छोटी कमियों को भी पहले ही पकड़ लेना चाहता है, जो आयोजन के दिन बड़ी परेशानी बन सकती हैं। आखिर दिन की भीड़ में जो गड्ढे, अव्यवस्थाएं या बाधाएं नजर नहीं आतीं, वे रात के सन्नाटे में साफ दिखाई देती हैं।

यहाँ एक सवाल यह भी बनता है।क्या हर बड़े आयोजन से पहले ऐसी सक्रियता ही व्यवस्था का स्थायी मॉडल नहीं बनना चाहिए? यदि निरीक्षण पहले हो, जिम्मेदारी तय हो और समय-सीमा का पालन हो, तो फिर हर बार आखिरी समय की भागदौड़ और खानापूर्ति की जरूरत ही क्यों पड़े?फिलहाल सकारात्मक संकेत यही हैं कि प्रशासन इस बार समस्या आने पर समाधान नहीं, बल्कि समस्या आने से पहले समाधान की नीति पर काम करता दिख रहा है। यदि यही गंभीरता अंतिम दिन तक बनी रही, तो बाबा महाकाल की सवारी श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम बनेगी।
 यही दूरदर्शी प्रशासन की पहचान भी है और जनहित की सबसे बड़ी सेवा भी।

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