सीएमएचओ की कुर्सी... या रिमोट कंट्रोल?

सांध्य प्रकाश विशेष

Jul 07, 2026 - 10:12
Updated: 4 months ago
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उज्जैन। स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों एक सवाल हवा में तैर रहा है।आखिर सीएमएचओ की असली कमान किसके हाथ में है? सरकारी रिकॉर्ड भले कहें कि जिला स्वास्थ्य अधिकारी का कार्यालय अपने तय पते पर है, लेकिन विभागीय गलियारों में चर्चा कुछ और ही सुनाई देती है। चर्चा यह है कि कई महत्वपूर्ण फैसलों और बैठकों का केंद्र कहीं और नजर आता है। अगर यह सिर्फ अफवाह है, तो विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में ऐसी पारदर्शिता दिखानी चाहिए कि ये चर्चाएं अपने आप खत्म हो जाएं।


हैरानी इसलिए भी है कि जिला अस्पताल की व्यवस्था बार-बार सवालों के घेरे में आती है। खुद कलेक्टर रौशन कुमार सिंह को देर रात निरीक्षण करना पड़ता है, कमियां मिलती हैं और लापरवाही पर 15 दिन का वेतन काटने जैसे सख्त कदम उठाने पड़ते हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब मुख्य अस्पताल की व्यवस्था ही बार-बार आईसीयू में पहुंच जाती है, तो नए स्वास्थ्य केंद्रों के सपने किस भरोसे पर दिखाए जा रहे हैं?
चरक अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कर्मचारी फुसफुसाकर कहते हैं कि फाइलें एक दिशा में चलती हैं और फैसलों की हवा दूसरी दिशा से बहती है। इन चर्चाओं की सत्यता का निर्धारण प्रशासन ही कर सकता है, लेकिन यदि ऐसी धारणाएं बन रही हैं तो यह अपने आप में विभाग की साख पर प्रश्नचिह्न है। चार महिलाओं के सामने लंबा भाषण देकर स्वास्थ्य क्रांति का दावा करना आसान है, लेकिन जनता अब भाषण नहीं, परिणाम देखना चाहती है। गांवों को डॉक्टर चाहिए, दवाइयां चाहिए, जांच की सुविधा चाहिए और समय पर इलाज चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यही है।क्या स्वास्थ्य विभाग जमीन पर स्वास्थ्य सुधार रहा है या सिर्फ प्रेस नोटों में? क्योंकि जनता अब एक ही बात कह रही है—
अगर व्यवस्था सचमुच मजबूत है, तो फिर कलेक्टर को बार-बार अस्पताल की नब्ज़ क्यों टटोलनी पड़ रही है?

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