प्रोटोकॉल भी संभालता था, गबन कांड में शामिल सटोरिया ...!
गबन कांड का एक आरोपी, प्रशासन के प्रोटोकॉल ग्रुप में शामिल था। पिछले 2 सालों से। इस आरोपी ने कई वीआईपी को दर्शन कराये। इसके अलावा मंदिर के बाहर खुद का जूता स्टेंड स्थापित कर रखा था। मंदिर के कर्मचारी यह बोल रहे है कि ... जूता स्टेंड की आड में सट्टा भी चलाता था। मगर किसी को भी कानो-कान खबर नहीं हुई कि ... एक सटोरिये को प्रोटोकॉल व्यवस्था से जोड़ रखा है।
भैरवगढ़ जेल से 500 मीटर की दूरी पर ही कालभैरव मंदिर है। जहां पर बाबा महाकाल के सेनापति बाबा कालभैरव को मदिरापान करवाया जाता है। जिसकी वजह से मंदिर में आमजनता से लेकर वीआईपी भक्त भी आते रहते है। वीआईपी भक्तों के लिए प्रोटोकॉल व्यवस्था है। एक ग्रुप बना हुआ है। जिसमें पुलिस प्रशासन व न्यायपालिका सहित अधिकारी व मंदिर के कर्मचारी शामिल है। इसी ग्रुप में शामिल था वह सटोरिया। जिसके खाते में गबन कांड की राशि ट्रांसफर की गई है।

लालघेरे में आरोपी का नम्बर
किसकी सिफारिश ...
गबन कांड तो अभी-अभी खुला है। मगर प्रोटोकॉल ग्रुप में शामिल रिंकु सिंह मांद्रे पुराने सटोरिये है। ऐसी चर्चा मंदिर के कर्मचारी इन दिनों कर रहे है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है। आखिर सटोरिये रिंकु सिंह को किसकी सिफारिश पर प्रोटोकॉल ग्रुप में शामिल किया गया। किसने उसके नाम की सिफारिश की थी। जिसके चलते पिछले 2 साल से एक सटोरिया वीआईपी भक्तों को दर्शन करवा रहा था। भरोसेमंद सूत्रों का कहना है। मंदिर से ही उसका नाम और नम्बर प्रोटोकॉल ग्रुप के लिए भेजा गया था। नतीजा ... जूता स्टेंड चलाने वाला प्रोटोकॉल की ड्यूटी करने लगा। इस ड्यूटी के चलते उसकी वर्दी से अच्छी खासी पहचान हो गई। जेल वालो से भी घनिष्ठता बढ़ा ली। तभी तो गबन कांड करने वालो ने सटोरिये के अकाउंट का भी उपयोग कर लिया।

आवभगत ...
मंदिर के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है। प्रोटोकॉल में शामिल होने के बाद आरोपी रिंकु ने सभी जगह घुसपैठ कर ली। खासकर वर्दी से अच्छा याराना था। अकसर वर्दी के साथ नजर आता था। मगर मंदिर के छोटे कर्मचारियों के साथ दादागिरी करता था। वर्दी को साथ देखकर, छोटे कर्मचारी व धंधा करने वाले डरते थे। अब वही वर्दी इस सटोरिये की आवभगत कर रही है। इधर मंदिर के गलियारों में रिंकु से परेशान सभी कर्मचारी व व्यापारी के बीच खुशी की लहर है।
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